आयकर विभाग ने बिना सीधे संपर्क वाली ई-असेसमेंट योजना की शुरुआत की। इसे कराधान सुधार में बड़ी पहल माना जा रहा है। इससे करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच आमना-सामना की जरूरत नहीं पड़ेगी। शुरुआत में राष्ट्रीय ई-आकलन केंद्र के तहत 58,322 आयकर मामलों का चयन किया गया है। पहले चरण में 58,322 मामलों को ई-आंकलन स्कीम 2019 के लिए चयन किया गया है। इसके लिए 30 सितंबर से पहले ही ई-नोटिस जारी कर दिया गया था।
इस पहल से पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी-आयकर विभाग
राजस्व विभाग ने कहा है कि नई पहल से आकलन प्रक्रिया में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी। करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच आमना-सामना की जरूरत नहीं होगी। राष्ट्रीय ई-आकलन केंद्र देश भर में अधिकारियों के दखल के बिना ई-आकलन योजना में मदद करेगा। इससे करदाताओं को लाभ होगा। राजस्व विभाग ने कहा कि इस योजना से करदाताओं को अनुपालन में आसानी होगी, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी, कामकाज में विशेषज्ञता आएगी, आकलन की गुणवत्ता का स्तर सुधरेगा और मामलों का निपटान तेजी से हो सकेगा।
फेसलेस असेसमेंट से मानवीय संपर्क खत्म हो जाएगा
नेशनल ई-असेसमेंट योजना के तहत असेसमेंट अधिकारी और करदाताओं का मानवीय संपर्क खत्म हो जाएगा। -बड़े स्तर (इकोनॉमी ऑफ स्केल) पर काम होने से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा। करदाताओं के लिए कानून का पालन बढ़ेगा। पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ेगी। इससे असेसमेंट की गुणवत्ता और मॉनीटरिंग सुधरेगी। एक ही एजेंसी फेसलेस असेसमेंट का काम करेगी, इससे विशेषज्ञता बढ़ेगी। मामले तेजी से निपटेंगे।